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भूत पर विश्वास रखना चाहिए? - Should Ghost Believe? in hindi

भूत पर विश्वास रखना चाहिए? - Should Ghost Believe? in Hindi 

 विश्वास और अंधविश्वास के बीच फंसा हुआ यह विषय आज भी दुनिया के लिए चुनौती है। आप ने आज तक बहुत Ghost stories सुनी होगी और आप के मन मे ये सवाल जरूर आया होगा की सच मे क्या भूतों पर विश्वास रखना चाहिए?-Should Ghost Believe? क्योंकि बहुतों ने भुतों को देखा है या अनुभव किया है, और बहुत से लोग ऐसे भी है जहाँ भूत होने का बोलबाला होता है वहाँ रात गुजार कर आते है।  और उन्हे कुछ नही होता।


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भूत होते हैं या नहीं? - Ghost Believe?

Should Ghost Believe? मैं यहाँ एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हुं की अगर मैं यहाँ कह दूँ भूत होते है विश्वास रखिये। तो सबसे पहले अंधविश्वास निर्मूलन वाले मेरे पिछे पड जायेंगे। कहेंगे कहाँ है दिखाओ? और बाद मे आप लोग! इसलिए मैं यहाँ भूत होने और ना होने के कुछ तथ्य यहाँ पेश करूँगा मुझे पता है आप पाठक बहुत समझदार है झट से समझ जायेंगे।

सबसे पहले हम Silence की बात करेंगे फिर Science की, सायलेंस से मेरा मतलब है आध्यात्म! भाइयों-बहनों आध्यात्म के शब्द मे ही आत्मा शब्द छिपा है। जब आप भगवान, गॉड, ख़ुदा पर विश्वास करते हो उनकी अच्छी शक्तियों पर विश्वास करते हो तो उनके विपरीत बुरी शक्तियों पर(Ghost Believeभी विश्वास करना होगा। क्योंकि प्रकृति मे हर चीज का Negative होता ही है। 

शक्तियों को नियंत्रित करने के लिए यंत्र, मंत्र और तंत्र तीन बातों का उपयोग किया जाता है। और आत्मा भी शरीर छोड़ने के बाद एक मुक्त शक्ति ही है, किंतु प्रकृति के सहयोग के बिना वो आपको कुछ नुकसान या फायदा नही पहुंचा सकती। इसलिए तो अमावस और पूनम की घटनाओं का दुनिया में बोलबाला है। जब चंद्रमा का गुरुत्व बल पृथ्वी के गुरूत्व बल को प्रभावित करता है, तब  कुछ उथल पुथल होती है। आप इसका आसर समंदर के भरने उतरने पर भी देख सकते है। जिसे हिन्दी मे "ज्वार-भाटा" कहा जाता है।

तो यही कारणों से अतृप्त अपूर्ण इच्छाओं वाली भटकती आत्मायें प्राकृतिक संयोग द्वारा सुक्ष्म शरीर से कभी-कभी झलक मात्र दिखाई देती है। आथवा उनका अभास होता है। किंतु देखने वाला व्यक्ति इसे कभी सिद्ध नही कर सकता। क्योंकि वह सबकुछ अलौकिक अर्थात लौकिक मनुष्यों के सामर्थ्य के बाहर की बात है। Should Ghost Believe? अगर सिद्ध करना ही हो तो उसके लिए यंत्र, मंत्र और तंत्र तीनों के उपयोग के लिए पवित्ररता के साथ लंबी और कठीण साधना करना जरूरी होती है। जो हम आम इन्सानों के बस की बात नही है। 

अगर Ghost नही होते तो उनके बारे मैं सदियों तक इतनी चर्चा नही होती। और भगवान भी नही होते तो मंदिरों और प्रार्थना स्थलों मे इतनी भीड़ ना लगती। याद रखे मनुष्य की श्रद्धा लंबे समय तक वहीं पर टिकती है जहां से उसे  कोई अच्छी बुरी अनुभूती प्राप्त हो वरना डर और साहस तो विश्वास और अंधविश्वास  के उत्पादक है ही। 

यंत्र, मंत्र,तंत्र क्या है? 

इतिहास मे झोंक कर देखा जाए तो शक्तियों के प्रबंधन के लिए कुछ यंत्र बनाए हैं। यंत्र माना मशीन वाला यंत्र नहीं बल्कि कुछ गणितीय अंक, अक्षर और रेखाओं से तैयार किया जाता है। फिर मंत्रों से सिद्ध किया जाता है। अब रही तंत्रों की बात! तंत्र मतलब टोटके जो कुछ वनस्पति औषधि द्वारा मंत्र से सिद्ध किए जाते हैं। मंत्र तो आपको पता ही होंगे? पुर्वजों द्वारा कुछ विशिष्ट प्रभावशाली शब्द रचना तैयार  की गयी है वही मंत्र है। 


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भुत-प्रेत और विज्ञान - Ghosts and science 

आप के मन में कभी भी ये जरूर ये सवाल आया होगा की क्या विज्ञान भूत को मानता है? विज्ञान वही सच मानता है जो आंखों से दिखता है और सिद्ध हो सकता है। अलौकिक साइलेंस की शक्तियों को सिद्ध करने के लिए Scince का Power अब तक तो पर्याप्त नहीं है, वरना नंबर डायल करने पर होने वाले मिस्कॉल का करण विज्ञान बता सकता है। लेकिन पावरफुल संकल्प से याद करने पर उसे आने वाली हिचकी का कारण नही बता सकता। हाँ कुछ बातों को विज्ञान ने माना है जैसे गायत्री मंत्र के परिणाम से बुद्धिमत्ता बढ़ती है। ये एक संशोधन मे सिद्ध हो चुका है। अर्थात विज्ञान मंत्र के परिणाम को मानता है। विज्ञान की एक कमाल की बात ये है की वो सूक्ष्म शरीर को मानता है, जिसे वो Quantum theory कहता है। फीर भी विज्ञान की माने तो भूत वगैरह कुछ नही है।

हमारे लिए घटी हुई हर अघटीत घटनाओं का सटीक वैज्ञानिक विश्लेषण भी विज्ञान कर सकता है। और कारण बता सकता है। किंतु क्यों घटी? इसका समाधान हमारे लिए महत्वपूर्ण है। जैसे किसी सुंदर बच्चे को किसी की नजर लगती है तो वो रोता है, तब विज्ञान ये सिद्ध कर सकता है वो क्यों रो रहा है, उसके शरीर मे क्या परिवर्तन हुआ है? उसे क्या दर्द है? आदी और जब हम नजर उतराते है और बच्चा शांत हो जाता है। तब विज्ञान शारीरिक Fitness जांच मे कुछ व्याधी नही पाता। बस इतना ही किंतु वास्तविक कौन सी शक्ति कार्य कर रही है यह नही ढूंढ सकता। राम सेतू  मे तैरने वाले पत्थरों को संशोधित करके विज्ञान ने बताया की शैवाल नाम के हलके पदार्थ से वह बने है। इसलिए तैरते है किंतु हमारा कहना है की हर प्राकृतिक रचना ही भगवान की रची है। इसलिए  वैज्ञानिक आधार होने के बावजूद भी वह  इश्वरिय चमत्कार ही है वरना जहां से भगवान राम गुज़रे वहीं पर वह पत्थर उपलब्ध क्यों ये भी तो सवाल हो सकता है? 

तो मेरे सीधे कहने का मतलब यह है की विज्ञान के आधार पर अलौकिक चमत्कार भले कुछ ना हो, सबकुछ अंधविश्वास हो, वो आपने जगह सही है। लेकिन जो भी है, आपने आप मे कुछ तो है,वरना विज्ञान भी यह मानता है की बिना उर्जा के पत्ता भी नही हिलता। Ghost Believe? तो हम भी Positive उर्जा माना भगवान और Negetive उर्जा माना शैतान मान रहे है। Megnetic power  भी यही दर्शाती है पृथ्वी का दक्षिण ध्रुव माना निगेटिव्ह और उत्तर ध्रुव माना पॉजेटिव्ह इसी कारण हम सामान्य व्यवहार मे भी उत्तर दक्षिण शुभ अशुभ मानते है। 

यह बातें समझने मे ज़रा सूक्ष्म है किंतु हम यहां ज्यादा चर्चा ना करते हुए यही कहेंगे की जिनको विज्ञान के शिवाय और किसी बात को Believe नही करता नही वह बिल्कुल भूत-प्रेत को ना माने! जबतक विज्ञान से सिद्ध ना हो। लेकिन जिन्हे आध्यात्म से लगाव है वह बिल्कुल भगवान के साथ-साथ शैतान को भी मान सकते है की ज़रूर कोई ना कोई भूत नाम की अदृश्य उर्जा होती है। अब  तो आप कुछ - कुछ समझ गए होंगे की क्या भूतों पर विश्वास रखना चाहिए? या नहीं Should Ghost Believe? आखिर सब की अपनी-अपनी सोच पर है,जो चाहे मान सकते है।

आशा करता की Hindi Hints की यह पोस्ट आपको जरूर पसंद आयी होगी, आप आपनी राय निचे कमेंट बॉक्स मे लिखना नही भुलना दिल से धन्यवाद!

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