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भूकंप के प्राकृतिक संकेत-Natural sign of Earthquake in Hindi

Natural disasters का एक अंग भूकंप भी है, जिसके आने का अंदाजा आम नागरिक को होना बहुत जरूरी है। वरना एक मिनट मे शहरों को स्मशान बनाने कि शक्ति इस आपदा मे है इसलिए आओ जानते है, भूकंप के प्राकृतिक संकेत-Natural sign of Earthquake in Hindi क्या है?


Natural - Hints - of - Earthquake-Hindi


भूकंप के प्राकृतिक संकेत क्या है?

What is the Natural Sign of an Earthquake?

विज्ञान अब तक ठीक से नही बता सकता की "आज भूकंप कितने बजे आने वाला है?" लेकिन ग्रहों के गणित पर आधारित महान भारतीय जोतिष शास्त्र भूकंप ही नही बल्कि अब तक बहुत से Natural आपदाओं की सटीक भविष्यवाणी कर चुका है  चाहे तो आप Old records कि जाँच कर के देख सकते हो। 

जब भूकंप आने वाला होता है तो गाय को पहले पता चल जाता है, और वह अपने बंधे हुए खुँटे को उखाडने के लिए उसके चारो ओर चक्कर लगाती है। और गाय अगर खुली हो तो घर छोड़कर गांव के बाहर खुले मे भागती है। गाय का और लक्षण भूकंप के संकेतों मे गिना जाता है, जब भी भूकंप आने वाला हो गाय अपने सिंगो से जमीन से टकराती है। तथा खुरज कर मिट्टी निकालने की कोशिश करती है। 

इसी तरह कुत्ते-बिल्ली, सुवर आदी जानवर भी गांव के बाहर दौड़ते है। कुत्ते दिन मे हि लंबे स्वर मे रोते हुए दिखते है। इसलिए पुराने समय के लोग कुत्तों का रोना अशुभ मानते थे। 
भूकंप के संकेत पाने मे सबसे ज्यादा सांप संवेदनशील होते है क्योंकि उनका पूरा शरीर जमीन से चिपका होता है। और खास बात उनके कान नही होते, वह हर ध्वनि शरीर की त्वचा से महसूस  करते है। इसलिए अचानक बहुत सारे सांप या चूहे बिल से बाहर निकल कर भागने लगे समझ लो भूकंप आने का अनिष्ट होने वाला है। 

प्रणियों की तरह पंची भी Natural sign of Earthquake को महसूस करते है। खासकर पर्यावरण का सूचक माने जाने वाले और खुशी मे पंख फैला कर नाचने वाले "मोर" घबराकर बेचैनी से इधर-उधर भागते है तथा ज़ोर-ज़ोर से म्यांउँ-म्याउँ की गुहार लगाते है। इसी के साथ चिड़िया, कबूतर आदि अपना घोसला छोड़कर भागते है। 

जब चिटियाँ आवश्यकता से ज्यादा संख्या मे अपने बिलों से बाहर निकलती है। तो समझ जाओ ये भूकंप के संकेत है वैसे बरसात के आगमन समय मे भी बहुत सारी चिटियाँ बिलों से बाहर निकलती है किंतु बे मौसम निकले तो हम को समझ जीना चाहिए की ये  भूकंप के प्राकृतिक लक्षण है। 

आजकल विज्ञान ने भूकंप सूचक यंत्र खोज निकाला है, किंतु वो भी भूकंप का धक्का लगने के बाद, सूचना करता है।  और भूकंप की तीव्रता भी नापता है। इसलिए हमे विज्ञान पर नही बल्कि वर्तमान मे तो पूर्णता Natural sign of Earthquake in Hindi पर ध्यान देना चाहिए। तभी अपने आप को भूकंप के संकट से बचा पायेंगे। अब हम भूकंप के कुछ कारण देखते है, फिर उससे बचाव के उपाय जानते है। 

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भूकंप आने का क्या कारन कारण है?-Due to Earthquake

अब तक  आप के मन में ये सवाल ज़रूर आया होगा की "भूकंप की उत्पत्ति कैसे होती है?" हर घटना के पिछे कुछ ना कुछ कारण होता है, वैसे भूकंप आने के पिछे बहुत से कारण है। लेकिन आज हम केवल कुछ प्रमुख कारणों पर ही प्रकाश डालेंगे। 

भूकंप का खगोलीय कारण

वृहत संहिता लिखने वाले प्राचीन गणित तज्ञ वराह मिहिर ने लिखा है कि, 
जब भी कोई ग्रहण आता है उसके 40 दिन पहले और 40 दिन बाद तक भूकंप का ख़तरा रहता है, धरती के आजु-बाजु मे घूम रहे गृहों की गती मे तेजी और कमी के कारण भूकंप आ सकता है। तथा किसी ग्रह के वक्री होने से पृथ्वी का संतुलन  बिगड़ता है। और भूकंप के झटके, हिमपात, वर्षा, बाढ़, आंधी जैसे Natural disasters की संभावना बढ़ जाती है। 

भूकंप का वैज्ञानिक कारण

हमारी पृथ्वी मुख्य चार परतों से बनी है, 50 किलोमीटर तक की मोटी परत, अलग-अलग वर्गों में बंटी हुई है, उन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये Tectonic plates जब अपनी जगह से बहुत ज्यादा हिलती हैं, तो भूकंप आ जाता है। इनके खिसकने के दौरान एक-दूसरे के किनारे टकरा जाते है तो प्रचंड ध्वनि कंपन उत्पन्न होता है, और यही आकर पृथ्वी के पृष्ट से टकराता है तभी हमे भूकंप के धक्के महसूस होते है। 

भूकंप का ज्योतिषीय कारण

Natural sign of Earthquake की तरह ज्योतिष के भूकंप विषयी संकेत माने जाए तो जब शनि और मंगल ग्रह 180 डिग्री की दूरी पर हो या दृष्टि एक दूसरे पर पड़ने से भूकंप की संभावना अधिक होती है। और ये कहीं बार ज्योतिष सिद्ध भी कर चुका है। 

पूनम या अमावस के नज़दीक चंद्रग्रहण जैसी घटनाओं के घटित होने के बाद भूकंप आने की स्थिती पैदा होती है। 
 ज्योतिष अनुसार हस्त नक्षत्र, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, चित्रा नक्षत्र, पुनर्वसु नक्षत्र, मृगशिरा,और अश्विनी नक्षत्र में भूकंप की संभावना अधिक होती है।

भूकंप के मानवीय कारण

मानवीय गतिविधियों से भी भूकंप उत्पन्न होते है। जैसे की  तेल के लिए गहरे कुएँ खोदना, कृत्रीम जलाशयों के लिए विशाल बांध बंधना ( सन् 1967 में महाराष्ट्र मे कोयना बांध क्षेत्र में भूकंप आया था) जलस्त्रोत प्राप्त करने के लिए गहरे बोरवेल खोदना, अणु बम की टेस्ट के लिए विस्फोट करके देखना, और भी बहुत से मानव निर्मित कारण है जो भूकंप को कारण बनते हैं।


भूकंप से कैसे बच सकते है?-How to avoid an Earthquake?

भूकंप को या किसी भी Natural calamities को रोकना इन्सान या विज्ञान के बस की बात नही इसलिए हम कुछ सावधानी बरतकर हम अपनी जान बचा सकते है। 

भूकंप से जान कैसे बचाये?

उपर दिये गये कोई भी संकेत (Hints) आप को दिखाई दे तो अपनी जान बचाने के लिए तुरंत नीचे दिए गये उपाय कीजिए, तथा कुछ उपाय भूकंप के महसूस  होते ही करने है। 

1.भूकंप के संकेत देखकर आप अपने परिवार वालों को सचेत कर दो तथा अगर रिश्तेदार या गली, मोहल्ले वालों को सचेत करना चाहते हो तो इस बात सावधानी रखिये की, आपकी बात अफवा ना बन जायें और बे वजह लोग घबरा ना जायें हो सकता है कुछ संकेतों के बाद भूकंप आयेही ना!

2.  Natural sign of Earthquake देखकर आप और परिवार वाले रात में बारी-बारी नींद पूरी करने का प्लान बना सकते हो तथा हो सके तो सुरक्षित खुले मैदान मे सोने के लिए जा सकते हो। 

3. भूकंप का संकेत देखकर अपनी कीमती वस्तुएँ डॉक्युमेंट्स आदि Bank locker मे जमा रखिये। लॉकर की चाबी अपने पास रखे क्योंकि बैंक की Strong Room अपने घर से ज्यादा मजबूत होती है। 

4. भूकंप अचानक अगर आयें तो बिना कुछ सोचे मैदान की तरफ ज़ोर से दौड़ो, इस समय मेरा परिवार, मेरा धन इत्यादि सोचने मे एक क्षण भी मत गवाँवो एकबार "भूकंप भागो" बस ये दो शब्द ज़ोर से चिल्ला कर भागते-भागते ही बोल दो। देखना आपके पिछे सब भागेंगे, कुछ तो आपको भी पिछे छोड़ देंगे। 

5. बाहर दौड़ कर बिजली के खंबे पेड आदि से सावधान रहना किसी को भी छुना मत। 

6. अगर किसी तंग गली मे रहते हो चारों ओर उँची इमारतें  है तो इस समय घर मे ही रहना ठीक होगा। 

7. अगर बाहर मैदान नहीं है तो घर मे किसी कोने मे खड़े हो जाओ, इससे भी अच्छा घर के मुख्य द्वार पर रूक जाओ क्योंकि घर की दिवारें किसी भी साइड गिरे किंतु दरवाज़े मे खड़े होने से शरीर पर कुछ भी नही गिरेगा, और जान बच जाएगी। 

8. घर मे मजबूत टेबल, पलंग आदि फर्नीचर के नीचे छिप जाने से जान बच जाएगी। किंतु मलबे के नीचे दबने की संभावना होती है। फिर भी जान बची तो रेस्क्यु वाले निकाल लेंगे इसलिए इनका उपयोग ज़रूर करे। 

9. घर पर Youtube विडिओ कि मदत से भूकंप सूचक अलार्म यंत्र भी बना सकते हो जिससे अलार्म बजते ही आप सावधान हो सके और जान बच जाये। 

10. भूकंप के समय ना अफवाहें फैलायें ना उन पर विश्वास रखे, कुछ लोग अफवाओं से बेहद तनाव मे आते देखा है। और कुछ तो बिना भूकंप के तनाव के कारण मर गये है। इसलिए सावधान रहे सजग रहे क्योंकि अपनी सुरक्षा आपने ही हाथ मे है। 

आशा करता हुँ Hindi Hints की यह पोस्ट भूकंप के प्राकृतिक संकेत-Natural warning of Earthquake in Hindi आप को कुछ Motivation ज़रूर देगी। आप पर भूकंप की आपत्ती ना आये ऐसी भगवान से प्रार्थना करता हूँ। कृपया आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखे और पोस्ट को ध्यान से पढने के लिए दिल से धन्यवाद! 

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