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खरीदारी में मोल भाव की कला-Shopping Negotiation art Hindi

खरीदारी मे मोल भाव की कला-Shopping Negotiation art Hindi

दोस्तों हम कमाते इसलिए है की हमारे सुविधा के लिए कुछ ख़रीद सके, हम ज्यादा मेहनत इसलिए करते है की ज्यादा पैसा कमा सके लेकिन जब खर्च करने की बारी आती है तो पैसा बचाने की मेहनत बहुत कम करते है। यही बडी विडंबना है। शायद ऐसा इसलिए होता है की हम में मोल भाव करने की कला या आदत नहीं है। तो यह लेख आप को खरीदारी में मोल भाव की कला-Shopping Negotiation art की सिखाएगा। 


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 Negotiation क्या है?

 Negotiation को हिंदी में "मोल-भाव" कहते है। या फ़िर इसे कुछ लोग Bargaining अर्थात सौदेबाजी भी कहते है। दुनिया में जब से व्यापर शुरू हुआ है व्यापारी चाहता है अपनी वस्तु या उत्पादन के दाम हमेशा बढ़कर मिले लेकिन ग्राहक भी बहुत होशियार होते है।  वह हर वस्तु की कीमत क्वालिटी , आवश्यकता , उपलब्धता के अनुसार बराबर लगते है। इसी बा के लिए जो व्यापारी और ग्राहक के बीच संवाद चलता उसी को मोल भाव कहते है। 

वस्तु के गुणवत्ता की पहचान कैसे करे? - How to identify the quality of an item? in Hindi 

यह लेख हमारे और खास कर हमारे पत्नियों के काम आएगा क्योंकि मोल भाव करने मे स्त्रियां सबसे अग्रेसर होती है और चालाक भी ऐसे मे यह लेख उन को पढने को मिल जाए तो क्या कहना। 

 Negotiation तो छोड़ीए हमे तो सामान की भी परख ठीक से नहीं होती हर बार घरवाली की डांट खानी पड़ती है। खैर मज़ाक छोड़े, जब हम कुछ Shopping करने मार्केट मे जाते है तो सबसे पहले हमारा सामना व्यापारी की चालाक बुद्धी से होता है। वह हमे सस्ती चीज महंगे दामों मे बेचना चाहता है। हमे यहीं पर ध्यान देना चाहिए की वह जिस चीज की तारीफ कर रहा है वह १००% क्वालिटी वाली नहीं है वो तारीफ इसलिए कर रहा है की उसमे उसका मुनाफ़ा ज्यादा है। वरना ब्रँडेड वस्तु की कोई तारीफ नहीं करता। 

दूसरा जो दिखता है वह बिकता है। इसमे ना फंसे जो आप ने टीवी पर देखा वह अच्छा होगा इसलिए बिना भाव देखे मत खरीदे बाजार मे उससे अच्छी क्वॉलिटी भी कम कीमत मे उपलब्ध हो सकती है। इसलिए हमारे इस लेख का सबसे पहला टिप्स रहेगा "चौकसी", बिना चौकसी किये कुछ ना खरीदे हम ग्राहक है हम फायदा पहुँचाने वाले व्यक्ति है हमारा दर्जा दुकानदार से ऊँचा है। इसलिए एक भी चीज खरीदनी हो तो बिना शर्मायें 10-12 दुकानों मे चौकसी कीजिए देखना आप मार्केट के सबसे बडे ज्ञानी और अनुभवी ग्राहक बनेंगे। इतना ही नही आप के दोस्त भी Shopping के लिए आप को साथ लेकर जाना शुरू करेंगे। बदले मे आपका सम्मान भी बढ़ेगा। 

तीसरी बात यह है की आजकल डुप्लीकेट उत्पादन बडे चमक धमक वाली पैकिंग मे आ रहे है ता की हम आकर्षीत हो। इस बात की हमे खास सावधानी लेनी जो चमकता है उसकी गुनवत्ता की कोई गैरंटी नहीं होती। इसलिए हमे कोई भी चीज खरिदने से पहले अपने 2-4 पडौसीयों की राय जरूर लेना चाहीए, अगर उन्होने उसी पैकिंग या ब्रांड को खरिदकर धोखा खाया होगा तो आपको सचेत करेंगे। और साथ मे उनमे से कोई बेहतर गुणवत्ता वाली दुसरी वस्तु का नाम भी बता सकेंगे। 

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मोल भाव कैसे करें? - How to bargain?

मोल भाव या फिर "Bargaining कैसे करे?" आप को Negotiation करना हो तो सबसे पहले आप वस्तु की MRP पर ध्यान दे। एमआरपी  अर्थात Minimum retail price न्यूनतम खुदरा मूल्य जो सरकार द्वारा निर्धारित मूल्यों पर निश्चित किया जाता है। 

बाद मे यह देखना है की वह वस्तु ब्रँडेड है या नही, अगर है तो उसपर एमआरपी होती है। जिसका मोल भाव नहीं किया जा सकता। उस पर दुकानदार को मार्जीन भी बहुत कम मिलती है। ऐसी वस्तुएँ साधारण दुकानदार फ्रंट मे नहीं रखते। 

दूसरा बगैर ब्रँड वाली चीजें जिस पर Retailer को खुश रखने के लिए डबल कीमत तक हो सकती है। हम देखते है कभी-कभी दुकानदार कुछ वस्तुएँ MRP से कम कीमत पर भी देते है। ऐसी वस्तुओं की कीमत का हमे सही अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। इसलिए 1 चाहिए हो तो भी 10 पिस का मोल भाव करना चाहिए और किसी प्रकार उसे टाल कर अगले दुकान पर उसके बताये कीमत से कम मे मांग सकते है। उसको लगेगा हमे भाव पता है तभी तो मांग रहे है। 

बहुत सी कंपनियाँ Transport charge के हिसाब से कीमत तय करती है। जैसे: जो कीमत कंपनी एरिया मे होती है वह 500 किलो मीटर दूर तक नहीं दे सकती, 1000 किलो मीटर या दूसरे राज्य मे तो बहुत ज्यादा कीमत होगी।

जिस कीमत पर दुकानदार राज़ी ना हो और हम उठकर चले जाये तो भी ना बुलाये, समझ लो उसकी कीमत उसके कुछ ही उपर है।

कभी कभी-कभी वस्तुओं की कीमत 2-4% बढ़ जाती है जो चीज हमने पिछले माह 300 की खरीदी वह 320 की हो जाती है ऐसे मे हम को दुकानदार से पिछले माह के Stock से मांगना है ज़रूर दो चार पिस उसके पास बचे रहते है। अगर नहीं है तो मार्केट मे किसी ना किसी दुकानदार के पास ज़रूर मिलेगी। 

कभी 20 रूपये बढ़ाकर कंपनियाँ उसपर 30 रूपये वाली कोई वस्तु फ्री देते है हमे जरूरत हो तो ले सकते है। लेकिन बिना जरूरत की है तो 20 रूपये भी व्यर्थ जायेंगे। 

सौदा पक्का होने पर कैसे कैंसील करे? How to cancel when the deal is confirmed? in Hindi

कभी-कभी Shopping में ऐसा होता है की बहुत मोल भाव (Negotiation) की  लंबी खींचतान के बाद किसी कीमत पर सौदा पक्का हो जाता है। लेकिन फिर भी किसी कारण आपका मन उस वस्तु या कीमत पर नहीं बैठता जो आप ने स्वयं तय कि है। 

ऐसे मे आप कि हिम्मत नहीं होती अब मना करने की और मन मे तनाव उत्पन्न होता है ऐसे मे हमे क्या करना चाहिए? 

घबराये नहीं आप ग्राहक है। और आप को सबसे ज्यादा हक है। हिम्मत के साथ उसे प्यार से कह दीजिए देखिये सेठ मै कारण नहीं बता सकता लेकिन आज यह वस्तु नही खरीदना चाहता। आपका समय लेने के लिए माफ़ करना अगली बार फिर मैं आप के ही दुकान पर आउँगा। फिर भी अगर वह कारण पुछेगा तो मत बताना, क्योंकि कुछ भी बताओ तो वह चर्चा बढ़ेगी और चालाक दुकानदार कुछ कीमत कम कर के आप को फिर से ज़बरदस्ती राज़ी करवा सकता है। भले ही वो आप की तरफ क्रोध से देखे, लेकिन आप इतना कहकर वहाँ से निकल जाये। 

और अगर इससे भी बचना चाहते हो तो Fake call का App मोबाइल मे डालकर रखिए असली कॉल Silent mode पर रखकर बात-बात मे उसे चालू करे जब Tone बजे तो उठाकर फोन पर ऐसी Acting करे की घर वालों का Phone call हो और उन्हे बताये मै मार्केट मे हूँ, फलानी वस्तु ख़रीद रहा हुँ। और फिर "क्या कहा? बडे भैय्या लेकर आयें?" मुझे क्यों नहीं बताया? बात खत्म फोन रख दो सेठजी से Sorrey कहो चलते बनो।

दूसरी आइडिया यह है की पेमेंट के लिए जानबूझकर Debit Card का उपयोग करे। और गलत पिन डाल दे पेमेंट नही होने पर स्वारी कुछ गड़बड़ है, अभी नकद नहीं है, फिर आकर ले लूँगा कहकर निकल जाओ। दुकानदार उधार रखने को कहेगा तो सीधे कह दो नही मैने जिंदगी मे कभी एक मिनट का भी उधार नहीं रखा। आप मेरा प्रण ना तोड़ो मैं अभी कैश लेकर वापस आता हूँ कहकर निकल लो। वैसे हिम्मतवालों को सौदा टालने के लिए ज्यादा कुछ जरूरी नही पड़ता। 

ऑनलाइन खरेदी कला - Online shoping art 

ऑनलाइन में कैसे मोल भाव (Negotiation) कर सकते है? यह सवाल आप के मन में ज़रूर आया होगा। ऑनलाइन खरेदि में वस्तुओं को कंपनी की एप या Website पर सर्च ना करके सीधे Google पर Surch करें इससे होगा ये की वही वस्तु अलग-अलग Service company के पास अलग कीमत मे दिखेगी। तथा उसी वस्तु को बनाने वाली कंपनी भी बदल होगी तो कीमत मे फर्क मिलेगा। पहले पता करो की कौन सी कंपनी की वस्तुएँ अच्छी होती है। दो तीन कंपनियों के मंगाकर एक रख सकते हो। 

उसके बाद चाहो तो उस कंपनी के सर्विस सेंटर से सीधे संपर्क करके उस मॉडल कि कीमत पूछ सकते हो। तथा नज़दीकी एरिया मे उसके शो रूम का Location पूछ कर वहाँ से खरीद सकते हो। 

इन सभी बातों को ध्यान मे रखकर हमे सही मोल भाव करना चाहिए। और हमारे मेहनत के पैसे बचाने चाहिए। आप के पास और कोई सुझाव है तो नीचे कमेंट बॉक्स मे ज़रूर लिखे। आशा करता हूँ की Hindi Hints की यह खरीदारी में मोल भाव की कला-Shopping Negotiation art Hindi पोस्ट आप को ज़रूर पसंद आयी होगी। ध्यान से पढने के लिए दिल से धन्यवाद!

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