Header Ads Widget

Ticker

50/recent/ticker-posts

क्या Non-Veg खाना अच्छा है?

दोस्तों आप के मन में भी यह सवाल कभी न कभी आया होगा की, क्या Non-Veg खाना अच्छा है? मांसाहार को लेकर दुनिया मे ढेर सारे विचार है, खास करके भारत मे। लेकिन दावा करता हूँ मित्रों आज आप यह लेख पढ़कर इस विषय मे अन्य कहीं भी ज्ञान ढूँढने की जरूरत महसूस नहीं करेंगे। 


Kya-Non-Veg-khana-achha-hai

मांसाहार और मनुष्य शरीर Carnivores and Human bodies in Hindi

Leaf Vegetable तथा Fruit vegetables खानेवाले और मांसाहार  ना करनेवाले मनुष्य हमेशा यह तर्क देते है की Non-Veg खाने के लिए मनुष्य का शरीर योग्य नहीं है।

इस बात मे केवल आधा सच है क्योंकि वर्तमान समय 70-80% लोग विविध पशुओं का माँस खाते भी है और पचाते भी है। चीन जैसे देश ने तो दुनिया को पिछे छोड़ा है इस विषय मे। तो फिर बाकी आधा सच क्या है? 

बाकी आधा सच यह है कि वर्तमान का मनुष्य माँस को पका कर मुलायम बनाता है और खाता है। वर्तमान मनुष्य की Capacity कच्चा माँस खाने की बिल्कुल नहीं है। जिन्हे लगता है वो खाकर देखे अपनी जोखिम पर क्योंकि ना मनुष्य के दात माँस नोचने या तोड़ने लायक तेज़ है ना उसको पचाने योग्य पेट में अंतड़ियां लंबी है। 

विज्ञान के अनुसार जिसे मनुष्य का प्राथमिक स्वरूप जिसे पाषाण युग कहते है। भोजन के लिए भटकते रहते थे और फल पत्तों के साथ पशुओं का शिकार करके कच्चा खाते थे उस समय की शरीर रचना उस अहार के लिए ज़रूर सुयोग्य थी। जंगलों मे आग लगने से भुने हुए प्राणियों का माँस जब मनुष्य ने खाकर देखा तो उसे कच्चे माँस से ज्यादा स्वादिष्ट लगा। तब से वह भुन कर या पकाकर खाने का आधिन हे गया इधर प्रकृतिने भी अपना काम शुरू करके शरीर उसी योग्य बदल दिया। इसका अर्थ मनुष्य मांसाहारी है और शाकाहारी भी जिसे हम सर्वाहारी कह सकते है। अब आप सोच रहे होंगे शरीर कैसे बदला होगा? 

हम जो भी क्रियाकर्म करते है उसका सारा लेखा-जोखा  Informetion  डीएनए (DNA) में स्टोर होती है। और वही रेकॉर्ड एक पिढी से दूसरी पिढी की और ट्रांस्फर होता है। जब गर्भ मे नयी पिढी का नया शरीर बनने लगता हेै तो उसमे उसी स्टोरेज अनुसार परिवर्तन आता है। जैसे आजकल के मच्छर कॉइल से नहीं मरते बल्कि डेअरींग से उसपर जाकर बैठते है। क्योंकि उनके शरीर मे अब वह जहर का सामना करने की ताकत आगयी है। 

तो यह है मनुष्य शरीर और मांसाहार (Carnivores and Human bodies) का पुरा सच

ये भी पढ़िए :

शाबूदाना शाखाहारी है या मांसाहारी? 



क्या Non-Veg खाना सही है? 
Non-Veg Eating Is Right? Hindi 

हमने उपर यह जान लिया की मनुष्य सर्वाहारी है हम चाहे तो अगली पीढ़ियाँ धीरे-धीरे पूर्ण मांसभक्षी बना सकते है किंतु भगवान ने मनुष्य को सर्वाहार के साथ सोचने की बुद्धी भी दियी है जिससे हम क्या मांस खाना पाप है या पुण्य? सही और गलत क्या है इसका फैसला ले सकते है। 

इसलिए हम यह सोच सकते है कि माँस खाना कितना जरूरी है और कितना नही। मांस खाने के फायदे और नुकसान क्या है? अथवा प्रकृतिने हमको दोनों को अपनाने की क्षमता दियी है। 

मनुष्य को Meet क्यों नहीं खाना चाहिये? क्यों की जब हमारा विवेक प्राणों का मूल्य जानता है तो किसी बेजुबान पशुओं को मारना कितना उचित है? दया, क्षमा की अनुभूती समस्त सृष्टी मे केवल मनुष्य को ही दियी है। जब प्रकृतिने हमे खाने के लिए बहुत सा पोषक शाकाहार दिया है तो Non-Veg की जरूरत क्या है? बुद्धी के विकास के साथ मनुष्य को सभ्यता की पहचान हुई तो उसने खेती-बाडी का जुगाड करके अपने लिए शाकाहारी भोजन बनाना शुरू किया। इसमें कुछ तो अच्छी बात होगी! वरना मनुष्य चाहता तो अपने लिए सदैव मांसाहार का ही प्रबंधन कर लेता। 

दूसरी ओर जब खाने लायक रोचक कुछ ना लगे आत्म संतुष्टि ना हो तो मांसाहार पर्याय बचता है। क्योंकि खाने का मतलब केवल पेट भरना तो नहीं है। रेगीस्थान मे खेती नही कर सकते वहां पानी की कमी के कारण खाने योग्य शाकाहार उत्पन्न नही होता तो वहां Non-Veg ही एक मात्र पर्याय बचता है। कसरत करने वाले पहलवान मांसाहार का मार्ग चुनते है तो तेजी से उनका शरीर बनता है। एक तर्क यह भी है की प्रकृति के संतुलन मे मांसाहार जरूरी है। ताकी प्राणियों की संख्या ना बढ़े। लेकिन मांसाहार का भी संतुलन हो वरना आजकल पोल्ट्री फार्म से मांस का उत्पादन किया जाता है। 

तीसरी बात यह है कि वर्तमान युग मे शुद्ध शाकाहारी जीवन जीना बेहद मुश्किल हो गया है क्योंकि रोज़मर्रा कि जिंदगी मे पशुओं का माँस अब काफी हद तक प्रवेश कर चुका है। सुबह उठते ही टुथपेस्ट लगाते है जिसमें हड्डियों के चूर्ण का उपयोग होता है, नहाने जाओ तो साबुन मे चरबी का उपयोग, मेकअप करने जाओ तो क्रीम मे चरबी का उपयोग, कोई Fast food खाने जाओ तो उसमे चरबी के ऑइल उपयोग का डर अर्थात कलियुगी मनुष्य के लिए माँस से दूर रहना आती कठीण बन गया है। 

अंत मे मै तीनों बातें आपके सामने रखने के बाद यही कहना चाहूँगा की हम चाहे तो Protein rich vegetables खाकर और माँस भक्षण टाल कर अपनी आगे वाली पीढ़ियों को पूर्ण शाकाहारी बना सकते है। और मनुष्य के लिए यही पूर्ण सभ्यता होगी। 

भारत में मासाहार के आँकड़े

विवेकशील मनुष्य के लिए मांसाहार के प्रति जागरूकता पर यह लेख लिखने का कारण यह नीचे दिये गये आँकड़े है जो भारत की  सांस्कृतिक सभ्यता को ठेस पहुँचाने वाले है। 

राष्ट्रीय सैंपल सर्वे ऑफ़िस’ (NSSO) के सर्वे रिपोर्ट के सन 2011-12 के मुताबिक भारत में आठ करोड़ लोग गाय और भैस का माँस खा रहे थे अर्थात हर 13 में एक हुआ इस रिपोर्ट मे यह भी कहा है की सव्वा करोड हिन्दू थे जिसमे सवर्णों की मात्रा 7% थी। किंतु बाद मे 3 बार बडे सरकारी सर्वे हुए जिसके रिपोर्ट मे मांसाहारी वर्ग 23 से 37% के दरम्यान बताया है। 

लेकिन अमेरिका मे स्थित मानवशास्त्री बाल मुरली नटराजन तथा उनके सहयोगी अर्थशास्त्री सूरज जैकब इनके अध्ययन से पता चला है कि केवल सांस्कृतिक-राजनैतिक दबाव के कारण 23 से 37% वाला आँकड़ा बताया गया। अप्रैल 2018 में प्रकाशित उनके अध्ययन को प्रकाशित किया तो उसमे वास्तव 20% भारतीय शाकाहारी रह जाने का दावा किया गया। और 18 करोड यानी लगभग 15% गो-मांसभक्षी  बताया गया। (सभी आँकड़े साभार: गूगल से) 

मेरा आप के आगे आँकड़े प्रस्तुत करने का केवल यही उद्देश्य है कि, भारत एक सुसांस्कृतीक सभ्य शाकाहारी देश मे गिना जाता था। आज पश्चिमी देश हमारा अनुकरण करके  सच्चा मानव जीवन जीने की कोशिश कर रहे है। तब आप ही सोचिए की हम भारतीयों को अपना गौरव कायम रखना चाहिए या नहीं? 

आशा करता हुँ की आप अब Hindi Hints की इस पोस्ट से अच्छी तरह समझ चुके होंगे की Kya Non-Veg khana achha hai? या नहीं। आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखना। इस पोस्ट को ध्यान से पढने के लिए दिल से धन्यवाद! 

ये भी पढ़िए :



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ