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Hotel और Restaurant में भोजन की सावधानी

Hotel और Restaurant में भोजन की सावधानी 

दोस्तों होटल का खा खाना दो कारणों से खाया जाता है पहला शौक से और दूसरा मजबूरी से। लेकिन कारण कोई भी हो हमे Hotel और Restaurant मे खाना Order करने से पहले कुछ सावधानियां लेना जरूरी है क्योंकि खाने का कनेक्शन सीधा सेहत से है। इसलिए.... क्या लेनी है आगे देखते है। 

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Hotel और Restaurant कौन सा चुने? 

अब मन में यह सवाल आता है की "सबसे अच्छा रेस्टोरेंट कोन सा है?" शहर या पर्यटन स्थल पर बहुत से Hotel और Restaurant विज्ञापन से अच्छी सर्विस देने का दावा करते है लेकिन 90% तो फेल होते है बाकी बचे 10% जिन्हे ढूँढने की हममें ख़ासियत होना जरूरी है। 

आप जहां भी जाओ स्थानिक के कम से कम अलग-अलग 10 लोगों को प्यार से एक ही सवाल पूछे भाई यहाँ सबसे अच्छा होटल कौन सा है? क्योंकि लोकल व्यक्तियों को ज़रूर पता होता है की, कौन अच्छा है और कौन धोखेबाज़? जिस होटल का नाम ज्यादा लोगों के मुंह पर आयें बस वही होटल चुन लो। 

दूसरी बात यह है की जब भी आप किसी होटल मे खाना खाने के लिए जाते हो तो सबसे पहले आप की नजर वहां की स्वच्छता पर ज़रूर जाती होगी। पहले पांच मिनट आप होटल की स्वच्छता और रखावट के लिए दे वही आपको आगे की सर्विस का हाल पता चलेगा। और अगर पार्टी वगैरह के लिए ऑनलाइन Booking कर रहे हो तो होटल लिस्ट में ग्राहक लाइक रेटिंग को ज़रूर ध्यान में रखना। 


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लुभावने मेन्यू कार्ड (Menu card) से सावधान रहे

जी हां मैं बिल्कुल सच कह रहा हूँ मेन्यू कार्ड ही Hotel और Restaurant मालिक का एकमात्र औजार जिससे कभी-कभी घटिया खाने को भी बड़े दाम मे बेच सकते है। आप ने मेन्यू कार्ड पर कुछ ऐसे नाम पढ़े होंगे। 

दाल निज़ामी,

व्हेज मुमताज

शाही मुर्ग रोगनजोश,

राजशाही कढाई

मुग़लई बिर्यानी,

रोस्टेड स्टफ्ड टोमैटो

इनमें से कुछ नाम खास नाम बोल्ड अक्षर मे इसलिए लिखे जाते है कि आपको Special Items लगे और उसकी बिना प्राइज़ की सोचे तुरंत ऑर्डर कर दे इसमें होटल मालिक का मुनाफ़ा ज्यादा होता है।

और इसके अतिरिक्त हम लंबे चौड़े अनोखे नाम पढ़कर भी सोच मे पड जाते है की यह पदार्थ होगा कैसा? चलो खा कर देखते है, और ऑर्डर कर देते है। कुछ पदार्थ के नाम इतने आकर्षक होते है की मुँह मे पानी आ जाता है। और Order किये बिना दिल मानता ही नही जैसे "मुमताज मस्तानी" वगैरह।

मेन्यू कार्ड और मनोविज्ञान - Menu card and psychology

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान विषय पढ़ाने वाले शिक्षक चार्ल्स स्पेंस का कहना है की Menu card का कव्हर तक ग्राहक को लुभाने के अंदाज़ से बनाया जाता है। रिसर्च करके एक मेन्यू कार्ड बनाने मे डेढ से दो साल तक लग जाते है। 

मेन्यू कार्ड आप हमको लुभाने के लिए फसाने के लिए ही बनायें जाते है। इसके पिछे मनोविज्ञान (Psychology) है रिसर्च किये जाते है। इसमे छोटी-छोटी चीजें भी बड़ी चतुराई से डाली जाती है, ताकी आप खाने के साथ उन्हे भी ऑर्डर करें जैसे मारवाड़ी मठ्ठा, रोस्टेड मसाला पापड, अमेरिकन चटनी, क्रिस्पी पकौडे आदी। 

ग्राहक को आकर्षित करने के लिए व्यंजनों के नाम अलग फ़ॉन्ट मे भडकिले कलर के साथ लिस्ट से अलग करके डिज़ायन चौकट बनाकर लिखे जाते है। इससे हमे लगता है की यह खास पदार्थ उस होटल का स्पेशल और Famous dish होगा। 

Hotel और Restaurant के मेन्यू कार्ड का मोटा और शानदार होना ग्राहक को यह एहसास दिलाता है की वह किसी बड़े रेस्टोरेंट मे आयें है और उन्हे बहुत अच्छा खाना मिलेगा। 

Italic font मे लिखावट पदार्थ की क्वालिटी विश्वसनीयता बढ़ाती है। वही पढने में मुश्किल लगने वाला व्यंजन का नाम पदार्थ के स्वाद की उम्मीद बढ़ाता है। लगता है यह खाकर ही देखे। गोल-गोल लिखने से पदार्थ की मिठास तथा तेडेमेडे अक्षर नमकीन और तिखे होने का एहसास दिलाते है। 

लिखावट मे कलर का भी खास ध्यान रखा जाता है। हारा कलर Helth के लिए अच्छाई प्रदान करता है यह तो जाहिर है ऑरेंज कलर भुख की तीव्रता बढाता है। लाल कलर तुरंत ऑर्डर चुनने का मन कराता है। 

इसी तरह कीमतों में भी हेराफेरी कराके उसके सस्ते होने का एहसास दिलाते है। जैसे 500 रू की थाली 499 रूपये या 100 की डीश 99 रूपये लिखी जाती है। 1 रुपया कम करके सस्ता दिखाया जाता है। इसके पिछे भी मनोविज्ञान छिपा हुआ है। 

खाना ऑर्डर करने की सावधानी - Food ordering precautions

Hotel और Restaurant में खाना आर्डर करते समय Mix Veg या फूलगोभी तो बिल्कुल ना मंगायें क्योंकि इसमें किेडे होने के बहुत संभावनाएं होते है और रसोईये के पास हमारी घर वाली जितना समय कहां होता है की वह चुन-चुन कर निकाले। 

चायनीज खाना (Chinese food) मंगा रहे है तो वेटर से कह दे की उसमें अजीनोमोटो का बिल्कुल उपयोग ना करें अगर सॉस आदि मे पहले ही डाला गया हो तो उपर से ना डालने को कहे। यह टेस्ट तो देता है लेकिन सेहत के लिए बहुत हानिकारक होता है। 

आप दाल चांवल के शौकीन है तो ज़रूर पूछ लेना की चांवल कब बने हैं वरना इस व्यंजन को अक्सर गर्म कर-करके परोसा जाता है। 

दाल तड़का, दाल फ्राई, दाल मखनी वह स्पेशल ताजा बनाई जाती है। उसमे भी दाल पहले से उबालकर फ्रिज मे रखी जाती है। 

South Indian इड़ली, डोसा, मेदुवडा ऑर्डर कर रहे हो तो सांभर अलग से मंगवायें क्योंकि बहुत जगह सांभर खाने लायक नही होता तब आप इटली के चटनी के साथ तो खा सकते हो। 

टेबल पर रखी गयी चटनी, आचार बिल्कुल ना खाये हो सके तो अलग से दूसरी मंगायें क्योंकि यह दिन भर उस टेबल से उस टेबल घूमते रहते है और रात मे ढाक कर रखने का भी भरोसा नहीं रहता खत्म होते ही उपर से दूसरी भर देते है। 

जितना हो सके पत्तोंवाली हारी सब्जी ही ऑर्डर करे क्योंकि इनके ताज़ा होने की संभावना ज्यादा होती है। जैसे पालक पनीर, मेथी वगैराह। मटन, चीकन तो हमेशा तल कर ही रखा जाता है। उसके ताज़ा होने की संभावना बहुत कम होती है। 

Highway पर अगर किसी धाबे पर रुके है बहुत ही सावधानी से ऑर्डर करे मैं आप को एक व्यंजन बताता हूँ जो हमेशा ताज़ा रहता है। राजस्थान और गुजरात मे प्रसिद्ध "सेव टमाटा सब्जी" यह बने के आधे घंटे तक ही फ्रेश रहती है बाद में सेव इतना गल जाता है की उसे वापस गरम करके नहीं परोस सकते। 

आशा करता हुँ मित्रों की आपकी सेहत और पैसों का ध्यान रखने वाली Hindi Hints की यह Hotel और Restaurant में भोजन की सावधानी पोस्ट आप को जरूर पसंद आयी होगी और साथ मे यह भी आशा करता हुँ की इस पोस्ट लिंक को आप वाटसप, Facebook पर शेयर करके अपने मित्रों को भी सावधान करेंगे। आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखना ना भूले। पोस्ट को ध्यान से पढने के लिए दिल से धन्यवाद! 

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