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पुलिस केस (FIR) अधिकार-Police Case (FIR) Rights in Hindi

पुलिस केस (FIR) अधिकार-Police Case (FIR) Rights in Hindi

हर किसी आम नागरिक के मन में पुलिस केस FIR को लेकर डर होता है, और डर होना भी चाहिए। लेकिन तब जब हमने कुछ अपराध किया हो। अगर हमने अपराध किया ही नहीं तो डरने की कोई आवश्यकता नहीं। Police Case, FIR सब हमारे न्याय सुविधा के लिए ही तो बनाए गए  है। इसका बे झिझक उपयोग करना हमारा पूर्ण अधिकार ( Rights) है। 


Police-Case-FIR-Rights

क्या होती है एफ़आईआर?  
What is FIR? in Hindi

FIR अर्थात First Information Report  इसकी की प्रक्रिया जो भारतीय दंड संहिता 1973 कि धारा 154 अनुसार पूर्ण की जाती है। अपराध के शिकार हुए व्यक्ति द्वारा न्याय माँगने के लिए अपराधी की जो शिकायत मौखिक या लिखित रूप से पुलिस थाने मे प्राथमिक स्वरूप मे जो रिपोर्ट दर्ज करवाई जाती है उसे FIR कहते है। 

 FIR के उपयोग

एफआईआर दस्तावेज़ वह  है जिसके आधार पर अपराधी को सजा दिलाने की कार्यवाही की जाती है। कोई सामान के चोरी होने पर उस पर निकाला गया Insurance claim करने के लिए एफ़आईआर आवश्यकता होती है। आपकी वस्तु के दुरुपयोग की संभावना रहती है। जिससे आप किसी ऐसे अपराध में फंस सकते हैं। जो आपने कभी किया ही नहीं। ऐसी परिस्थिति में आपको नुकसान से एफआईआर बचाती है।

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किन मामलों में दर्ज होती है एफ़आईआर?

अपराध दो तरह के होते है एक गंभीर और दूसरा साधारण 

साधारण अपराध मामूली अपराध होते हैं अर्थात मामूली मार पीट, झगड़े, गाली-गलोच आदि। ऐसे मामलों में सीधे तौर पर एफ़आईआर दर्ज नहीं की जा सकती, लेकिन शिकायत को सीधे मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया जाता है। और मजिस्ट्रेट इस विषय में आरोपी को समन जारी कर सकते है। यानी ऐसे मामले में चाहे Jurisdiction हो या फिर नही हो किसी भी परिस्थिति में केस दर्ज नहीं हो सकता। 

दूसरे जो गंभीर किस्म के अपराध के होते हैं। जैसे गोली मारना, खून और रेप आदि करना, इनमें तुरंत एफ़आईआर दर्ज की जाती है। चाहे वो अपराध, अधिकार क्षेत्र मे हो या ना हो अधिकार क्षेत्र मे ना हो तो झिरो एफ आई आर लिखि जाती है जिसे फिर Transfer किया जाता है। 

पुलिस FIR कब टाल सकती है? 

 Crime rate ज्यादा ना बढ़े इसलिए टाल सकते है। (लेकिन ये कानूनी नही) 

अपराध की शिकायत पर संदेह हो तो पहले जाँच करने के लिए टाल सकते है। 

शिकायत करने वाला नशे कि हालत मे हो तो शिकायत दर्ज नहीं करा सकते। 

कैसे दर्ज कराएं FIR? किन बातों का ध्यान रखे? 

यदि किसी कारण वश यह लिखने में देर हो गयी तो उसका उल्लेख भी अपने ऊपर में करवाए। 

Police Casef.i.r. लिखते समय जटिल शब्दों का प्रयोग ना करें। 

याद रहे कि आपके आने जाने का समय भी Daily diary (रोजनामा) और F. I. R. मे दर्ज हो। 

FIR लिखवाते समय 9k फार्मुले को याद रखे

  1. कब: अपराध कब हुआ? समय
  2. कहाँ: अपराध कहाँ हुआ? जगह का नाम
  3. किसने: अपराध किसनेे किया? व्यक्ति का नाम या वर्णन
  4. किसको: अपराध किसके साथ किया? व्यक्ति का नाम या वर्णन
  5. किस लिए: अपराध किस लिए किया? यदि पता हो तो लिखे
  6. किसके सामने: अपराध किसके सामने किया? गवाह या सबूत के नाम लिखे
  7. किससे: किस हथियार से किया? नाम या वर्णन
  8. किस प्रकार: किस प्रकार किया? अगर आप ने देखा हो तो वर्णन लिखे
  9. क्या किया: वास्तव मे क्या-क्या किया? उसकी पूरी जानकारी लिखे और जो नुकसान हुआ वह भी लिखे

आप का अधिकार क्या है?-What is your Right

 CRPC 154 अंतर्गत FIR लिखवाना आपका पूर्ण अधिकार है। 

गंभीर अपराध वाली शिकायत पर संदेह का कारण बताकर आपकी शिकायत को टाल नहीं सकते। 

आप की शिकायत अनुसार अपराध अगर गंभीर लगता है तो पुलिस तुरंत ASI को भेजकर अपराध की संक्षिप्त रिपोर्ट बनाती है। और उसके आधार पर एफ़-आई-आर लिखी जाती है। 

गंभीर अपराध हो तो एक सप्ताह के भीतर पुलिस को जाँच पूरी करना पड़ता है। ताकी अपराध के सबूत नष्ट ना हो इसलिए आपकी शिकायत लिखने से इनकार नहीं कर सकते। 

लिखने के बाद आप को पढ़कर सुनाना और आपके हस्ताक्षर के बाद थाने की मुहर और थाना प्रमुख के हस्ताक्षर के साथ उसकी कॉपी लेना आपका आधिकार (Rights) है। जिसके लिए कोई फ़ीस नही होती। 

शिकायत मे Police या अन्य कोई भी अपने शब्द या वाक्य नहीं घुसेड़ सकते उसे पूर्ण आपके शब्दों मे लिखवाना आपका Rights है। 

एफ़आईआर दर्ज कराने के लिए जरूरी नही की आप को अपराध की व्यक्तिगत जानकारी हो। या आप ने अपराध होते हुए देखा हो। 

अगर किसी कारण से आप अपराध की सूचना तुरंत पुलिस को नहीं दे सके, तो घबराएं नहीं। ऐसी समय में आपको केवल देरी का कारण बताना होगा।

आप ने शिकायत लिखित स्वरूप मे दिए है तो fir के साथ उसकी कॉपी जोड़ना आवश्यक है। 

आपराधिक क्षेत्र के अतिरिक्त आप किसी भी थाने मे Police Case के लिए शिकायत लिखवा सकते हो, इसे Ziro fir कहा जाता है। 

FIR दर्ज नहीं कर रहे है तो क्या करे? 

आपका अपराध सच मे गंभीर है (जिसमे बिना वारंट के पुलिस जाँच के लिए गिरफ्तार कर सकती है) तो FIR दर्ज करना ही पड़ता है। अगर नही करते है तो आप अपनी शिकायत वरिष्ट पुलिस अधिकारी से कर सकते है। 

अगर आपकी किसी भी गंभीर शिकायत को  दर्ज करने से मना करते है, तो शिकायत को रजिस्टर्ड डाक द्वारा क्षेत्रीय पुलिस उपायुक्त को भेज सकते हैं।

इसके अतिरिक्त आप अपने क्षेत्र के मजिस्ट्रेट के पास कंप्लेंट पिटीशन दायर कर सकते हो कि 24 घंटे के अंदर केस दर्ज करके आपको उसकी कॉपी उपलब्ध करा दे। 

क्या होती है ज़ीरो एफ़आईआर?

अगर Crime थाने की अधिकार क्षेत्र में नहीं हुआ हो,  तब भी पुलिस को शिकायत कर्ता की शिकायत के आधार पर केस दर्ज करना होता है। इस परिस्थिति में बाद में शिकायत को क्षेत्र से संबंधित थाने में भेज दिया जाता है। इस तरह की प्राथमिक रिपोर्ट को ZERO FIR कहते है। अपराध देश के किसी क्षेत्र में हो इस सुविधा के कारण शिकायत किसी भी दूसरे क्षेत्र में दर्ज करा सकते है। इसको लागू करने के पिछे मक़सद यह है की जांच मे देरी ना हो। रेप वग़ैरा की केस मे पीडिता की मेडिकल टेस्ट करनी होती है, तथा अपराधी सबूत नष्ट करने का ख़तरा भी रहता है। इसलिए जीरो f. i. r दर्ज होने पर पुलिस शुरूआती जांच करती है 

अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

इसके अतिरिक्त अन्य दो महत्व पूर्ण जानकारियां आप को होनी चाहिए। 

Daily diary और FIR मे फर्क

किसी अपराध को सजा दिलवाने हेतु  Police Case Rights के आधार पर आप थाने में जाते हैं, तो आपको अपराध की जानकारी मांगते है। इसमें अपराध का टाइम, ठिकाना, वहाँ की स्थिति इत्यादि। यह सारी जानकारी Daily diary में लिखी जाती है बहुत से लोग अंजाने मे इसे ही एफ़आईआर समझ लेते हैं और संतुष्ट हैं। वास्तव एफ.आई.आर. की कॉपी आपको मिलती है, जिसमे उसका नंबर लिखा होता है जो आगे की कार्यवाही मे काम आता है। 

NCR और FIR मे फर्क 

सामान चोरी होने पर IPC धारा 379 के तहत एफ. आई. आर.  लिखी जाती है जिसपर IPC सेक्शन लिखा होता है। लेकिन सामान गुम हो जाने पर NCR लिखते है। जिसपर “नॉन कॉग्निजेबल रिपोर्ट” लिखा होता है और पुलिस इसको कोर्ट भी नही भेजती। केवल अपने रिकॉर्ड मे रखते है। अगर आपका सामान सच मे चोरी हो या है तो इस बात का ध्यान रखे की आपकी कौन रिपोर्ट लिखी जा रही है। 

आशा करता हूँ की Hindi Hints की इस पुलिस केस (FIR) अधिकार-Police Case (FIR) Rights पोस्ट की जानकारी से आप को ज़रूर फायदा होगा।  जानकारी पसंद आयें तो Coment Box में अपनी राय लिखना ना भूले। पोस्ट पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद!

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