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Normal delivery के लिए क्या करे?

Normal delivery के लिए क्या करे? 

प्रणाम दोस्तों, विवाहीत जीवन में संघर्ष तो अनेक आते है किंतु जब संतान प्राप्ती ता समय नज़दीक आता है तो पती-पत्नी दोनों इस बात से तनाव में रहते है की Normal delivery होगी या फिर Cesarean वाली? क्योंकि वर्तमान समय भारत में 70 से 80 % तक डिलीवरी सीजर द्वारा ही करने की नौबत आ रही है। तो चलिए जानते है Normal delivery के लिए क्या करे? 



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Normal delivery होगी की नही कैसे पता करे? 

महिलाओं को प्रेग्नेंसी के आखिरी दिनों मे बड़ी उत्सुकता और चिंता लगी रहती है की उनकी डिलीवरी कैसे होगी? Normal delivery होगी या फिर सीजर करना पड़ेगा? ऐसे में डिलीवरी के प्रति अगर उनको कुछ हिन्ट्स मिल जाये तो वह निश्चिंत रह सकती है जिसका असर उनकी अच्छी सेहत के लिए होगा। इसलिए कुछ संकेतों पर आज नजर डालते है जो Normal delivery के लिए जरूरी है। 

नॉर्मल डिलीवरी के लक्षण

पहला संकेत - Normal delivery के कुछ समय पहले बच्चे की हलचल धीमी या बंद हो जाती है। क्योंकि वह श्रोणी (Pelvic) के हिस्से में आ जाता है। 

दूसरा संकेत- मुत्राशय पर बच्चे की सर के दबाव के कारण महिला को बार-बार पेशाब को जाने की आवश्यकता लगती है। 

तीसरा संकेत- रिलैक्सिन हार्मोन पेल्विक के हिस्से में आकर सभी जोडों को मुलायम एवं ढिली पोजिशन में लाता है।

चौथा संकेत- गर्भाशय का चौडा हो जाना, जँच के दौरान डॉक्टर को इस बात का पता चल जाता है। 

पांचवा संकेत- गुदद्वार की मांस पेशियों का रिलैक्स होना और परिणाम स्वरूप पतली जुलाब का आना

छहवा संकेत - डिलेवरी से कुछ घंटे पहले पीठ में 40 से 60 सेकंड तक जकडन और तीव्र दर्द होना, कभी कभी योनी से खुन का थोडा-थोडा स्त्राव भी होता है। 

तो यह सभी लक्षण से हमे पता चल सकता है की Normal delivery होगी या नही।


Normal delivery के लिए घरेलू उपाय

अस्पताल का हज़ारों रूपये ख़र्चा और महिला को शारीरिक तकलीफ़ तथा पुरे परिवार के लिए मानसिक तनाव इतना सबकुछ Cesarean delivery के दरम्यान झेलना पड़ता है। लेकिन समय रहते अगर प्रेग्नेंट महिला को उचित तरीके से उपचार दिया जाए और उसकी देखभाल की जाए तो हम नॉर्मल डिलीवरी की संभावना 100% तक बढ़ा सकते हैं।, उसके लिए हमें अस्पताल की दवाइयों के साथ कुछ घरेलू उपाय भी करना बहुत आवश्यक होता है। क्योंकि पूर्वजों के मुकाबले अब हमारा बदलती जीवनशैली, बदलता खान-पान और व्यवहार हो गया है। तो चलिए जानते है नार्मल डिलीवरी के उपाय क्या है ?

स्वास्थ्य संभाले

डिलीवरी के 1 से 9 महीने महिला को बिल्कुल तनाव मुक्त और फ्रेश मूड मे रहना चाहिए। डिलीवरी में दर्द सहना पड़ेगा इस मानसिकता की पुरी

 तैयारी भी रहे और इसी के साथ शरीर में पर्याप्त खून की मात्रा को भी नियंत्रित करे जिससे शरीर मे कोई कमज़ोरी ना हो। सामान्य डिलीवरी में बहुत खून जाता है लेकिन वही Cesarean में उससे भी ज्यादा जाता है। 

व्यवस्थित भोजन

डॉक्टर की सलाह समय पर भोजन और व्यायाम भी करना आवश्यक है। केवल भूख शांत करने मात्र के लिए नहीं बल्कि गर्भवती महिला को आवश्यक तत्व से भरपूर एक पूर्ण अहार खाना आवश्यक है। जैसे आयरन, कैल्शियम की आवश्यकता को पूर्ण करने वाला भोजन हो। फल, हारी सब्ज़ियाँ, प्रोटीन युक्त पदार्थ आदी भोजन मे पर्याप्त मात्रा मे हो। 

समय समय पर पानी पीते रहना चाहीए

गर्भ में शिशु एक थैली में रहता है, पुरे शरीर के साथ गर्भ को भी पानी की आवश्यकता होती है। इसलिए महिला को दिन भर मे थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए। वैसे भी गर्भ से पेट फूलने कारण पेट में साधारण दिनों की अपेक्षा अनाज-पानी कम ही बैठता है। 

बाहर घूमने जाना

पुराने समय में गर्भावस्था में महिलाओं को घूमने-फिरने पर पाबंदी लगायी जाती थी लेकिन वर्तमान की महिलाओं की शारीरिक क्षमता और रहन सहन देखकर उनको शुद्ध हवा और शरीर की हलचल बेहद जरूरी है। लेकिन भारी चीजें उठाना या कहीं पर खींचातानी वाला ज़ोर लगाना बिल्कुल परहेज करना चाहीए। तथा Normal labour की तरह हल्के काम करना चाहीए और रोज़ सुबह शाम एखाद घंटा टहलने जाना चाहिए। वह भी Pregnancy के अंतिम एक-दो हफ्ते पहले तक। जब पेट फूल जाए चलने में बहुत तकलीफ़ हो रही हो तो बंद कर देना चाहिए।  


Normal delivery कितने हफ्ते में होती है?

पुराने परंपरागत अनुभव से मनुष्य के जन्म के लिए 9 महीने 9 दिन का समय निश्चित किया गया है। और वह सच भी था लेकिन अब मनुष्य का खान-पान और व्यवहार पूरी तरह बदल गया है उसका परिणाम प्रजनन पर भी दिख रहा है। आधुनिक यंत्र और तंत्र द्वारा अब डॉक्टर ही बच्चे के जन्म की तारीख बता रहे है। भले ही 2-4 दिन आगे पीछे हो लेकिन हफ्ता तो सही होता है। 
 
माहवारी की आखिरी  तारीख में 280 दिन मिलाए जाते या फिर 40 हफ्ते जोड़कर बच्चा पैदा होने की तारीख बताई जाती है। दूसरा यंत्र द्वारा अल्ट्रासाउंड करके बच्चे का गर्भाशय में आकर के आधार पर भी तारीख निश्चित की जाती है। दोनों तारीख में अगर एक हफ्ते से ज्यादा का अंतर दिख रहा हो तो अल्ट्रासाउंड के तारीख को ही पक्का माना जाता है। ऐसा बहुत कम केस में होता है कि बच्चा सात या आठ महीने में ही पैदा होता है। 

Normal delivery के लिए क्या खाना चाहिए

आप सोच रहे होंगे कि "बिना दर्द के नार्मल डिलीवरी" होने के लिए क्या खाना चाहिए? 

आप बिल्कुल सही सोच रहे है! ऑर्गन्स द्वारा शरीर की प्राकृतिक क्रियाओं को सुचारु रूप से करने मे खाद्यान्न की बहुत अहम भूमिका है। क्योंकि वही हमारे शरीर को आवश्यक घटक प्रदान करते है। 

इसलिए नीचे कुछ पदार्थ का सुझाव दे रहे है। जो भी सुझाव है आप अपनी सेहत अनुसार ही पालण करे। अर्थात जैसे पहले से ही मोटापे का शिकार है तो वजन बढ़ाने वाले घटक टाल दे। यह आप को Painless normal delivery के लिए फ़ायदेमंद रहेगा। अब देखते है Food for normal delivery सामान्य डिलेवरी के लिए क्या खाना चाहिए?

दूध और दूध से बने पदार्थ 

गर्भ में भ्रूण के विकास के लिए प्रोटीन और कैल्शियम की अत्यंत आवश्यकता होती है जो हमे दूध और दूध से बने पदार्थों में से मिलते है। दूध मे कैल्शियम, विटामिन बी, मैग्नीशियम, फास्फोरस और जिंक उपलब्ध होते है इसलिए Dairy products का खाने में अधिक उपयोग करे। 

फल और सब्जियों वाला अहार

मोसंबी, संतरा जैसी विटामिन सी युक्त फल खाने से बच्चे की त्वचा मुलायम बनती है तथा किसी संक्रमण से बचाव के लिए भी यह फल उपयुक्त है। कच्चा नारियल पानी भी फ़ायदेमंद होता है इसे डॉक्टर के सलाह से कुछ महीनों तक लगातार लेना चाहीए। 

इसके अतिरिक्त फलो मे Normal delivery के लिए शकरकंद बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए शकरकंद विटामिन ए के पुर्ती हेतु शकरकंद एक अच्छा स्त्रोत माना गया है।

इसमें Beta carotene की मात्रा आधिक होती है जो शरीर में पहुँचकर Vitamin 'A' मे बदल जाता है। और आप को बता दे विटामिन ए गर्भ के विकास मे बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आम तौर पर 10 से लेकर 40 प्रतिशत तक ज्यादा सेवन करने की आवश्यकता है। इसकी पूर्ति के लिए प्रतिदिन 100 ग्राम से 150 ग्राम तक शकरकंद खाना आवश्यक होता है। 

हारी सब्जियों मे पालक, मेथी, चुकंदर जैसी सब्जियाँ हर दिन के भोजन में होना चाहिए। पालक में आयरन होता है जो महिलाओं के शरीर के लिए अत्यावश्यक है। इसके अतिरिक्त ब्रोकली भी ज़रूर खाये यह बहुत सारे पोषक गुणों से भरपूर है। 

दाल और अंकुरीत बिंज

मुँग, उडद, तुवर, चना आदी की दाल तथा मटकी, मुँग आदी अंकुरीत धान शरीर में आयरन, कैलशिअम तथा विटामिन 'बी 9' की पुर्ती करते है। जो पहले तिमाही में माँ और बच्चे की सेहत के लिए बहुत आवश्यक है। विटामिन 'बी 9' की पुर्ती ठीक से नही हो तो बच्चे को भविष्य में अनेक रोगों के संक्रमण से जुझना पड सकता है। 

मांसाहार में अंडा 

जो महिलाएं मांसाहार कर सकती है उनके लिए अंडा बहुत फ़ायदेमंद है। क्योंकि यह सारे विटामिन के साथ कोलिन (choline) नामक तत्व से भी भरपूर होता है।  कोलिन तत्व गर्भ मे बच्चे की मेरू दंड और दिमागी विकास के लिए मदद करता है। अगर इसकी कमी हो जाये तो बच्चा मंदबुद्धि भी हो सकता है। 

एक अंडे से तकरीबन 133 मिली ग्रॅम कोलिन मिलता है जो रोजाना जरूरत के 25% है। 

अंडे के प्रोटीन, फैट और अन्य सभी पोषक तत्व Normal delivery को आसान करते है। 

सुकामेवा का सेवन

Normal delivery के लिए अपनी सेहत के हिसाब से प्रेग्नेंसी में सुकामेवा भी खा सकते है। मनुका, अंजीर, बादाम, काजु, आक्रोड, खजुर, खोबरा आदी पदार्थ शरीर की उर्जा बढ़ाना, शरीर में खून बढ़ाना इसमें मदद करते है। सुकामेवा खाने से भूख थोड़ा कम लगती है लेकिन समय का नियोजन करके उचित समय पर खाने से लाभ पहुँचता है।

हो सके तो पुरे 9 महीने तक का खान-पान का चार्ट अपने डॉक्टर से बनवा सकते है। उस चार्ट को अपने वजन और सेहत के हिसाब से हर तीन महीने में अपडेट भी करवा सकते है। 


नॉर्मल डिलीवरी के लिए महीने में क्या खाना चाहिए?

बहुत कुछ सावधानी बरतने के बाद भी जब 9 वे महीने में खाने के बारे में सोचते है तो महिलाएं अक्सर उलझन में पड़  जाती है की इस आखिरी महीने क्या खाए और क्या नहीं खाए? तो चलिए जानते है। Food for normal delivery in 9th month

तील के लड्डू 

तील के लड्डुओं को खाने से बच्चेदानी मे बच्चे का सीर बाहर की ओर घूमने में मदद मिलती है जिससे नॉर्मल डिलेव्हरी होने मे आसानी होती है। 

गुनगुना पानी 

नौवे महीने में गुनागुना पानी पीने से मांस पेशीयां तनाव रहीत होती है। अगर गुनगुना पानी नही भी री सके तो ठंडा पानी तो बिल्कुल नहीं पीना चाहिए। वरना डिलीवरी के समय दर्द ज्यादा होने की संभावना बढती है। 

दूध और घी

पुराने जानकारों के अनुसार नौ वे महीने मे दूध मे घी डालकर पीने से गर्भाशय में चिकना हो जाता है। लेकिन अगर महीला का वजन पहले ही संतुलन से ज्यादा हो तो इस उपाय को टालना चाहिए। 

खजूर का सेवन

नौवे महीने मे खजूर आवश्य खाये जो गरमी वाला होता है इस आखरी महीने मे खजूर खाना गर्भाशय को आवश्यक गर्मी प्रदान करता है। जो नॉर्मल डिलीवरी के लिए बहुत आवश्यक है। 

अदरक और लहसुन 

अदरक और लहसुन भी शरीर के लिए गर्मी के स्रोत है। तो इनका भी सेवन इन दिनों मे लक्षणीय हो।

Hindi Hints के Normal delivery ke lie kya kare?  इस लेख मे हमने नॉर्मल डिलीवरी के संकेत उसके लिए उपाय के साथ प्रेग्नेंसी मे खान-पान पर ध्यान इस बारे में जानकारी पढी है। आशा करता हुँ की आप को यह लेख ज़रूर पसंद करते आया होगा। आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखना। लेख को ध्यान से पढने के लिए दिल से धन्यवाद!

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